डिंपल भारद्वाज, दिल्ली नगर निगम (MCD) के प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों के लिए विशेष नेत्र जांच प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम देश के प्रतिष्ठित संस्थान All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) आई सेंटर में आयोजित हुआ, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों ने शिक्षकों को बच्चों की आंखों की शुरुआती जांच से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी।
स्कूल स्तर पर ही होगी दृष्टि समस्याओं की पहचान
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को इस काबिल बनाना है कि वे स्कूलों में बच्चों की आंखों की शुरुआती स्क्रीनिंग कर सकें। डॉक्टरों ने बताया कि किन लक्षणों के आधार पर बच्चों को चिन्हित किया जाए और कब उन्हें आगे की जांच के लिए रेफर करना जरूरी होता है। प्रशिक्षण के बाद शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में ऐसे बच्चों की सूची तैयार करेंगे, जिनकी विस्तृत जांच AIIMS के विशेषज्ञों द्वारा की जाएगी।

जरूरतमंद बच्चों को मिलेंगे निःशुल्क चश्मे और उपचार
योजना के तहत जिन बच्चों को चश्मे की आवश्यकता होगी, उन्हें मुफ्त चश्मे उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं जिन बच्चों को अतिरिक्त उपचार की जरूरत होगी, उनका समुचित इलाज भी सुनिश्चित किया जाएगा। यह पहल बच्चों में समय रहते दृष्टि संबंधी समस्याओं को रोकने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
20 स्कूलों से पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत
दिल्ली नगर निगम ने इस योजना की शुरुआत फिलहाल 20 स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की है। लक्ष्य है कि 31 मार्च तक इन विद्यालयों में जांच पूरी कर पात्र बच्चों को चश्मे वितरित किए जाएं। पायलट प्रोजेक्ट सफल होने पर इसे पूरे दिल्ली नगर निगम स्कूलों में लागू करने की योजना है।

सामाजिक संस्थाओं का सहयोग भी शामिल
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन श्री सुधीर भटनागर की संस्था SAARD द्वारा किया गया। Sun Grow Company के श्री वरुण कुमार ने 500 निःशुल्क चश्मे उपलब्ध कराने की घोषणा की। वहीं Osel Foundation के श्री विवेक डोवाल और श्रीमती इंदु ने सुनने में कठिनाई वाले बच्चों के लिए ₹10,000 तक की लागत वाली 200 हियरिंग मशीनें मुफ्त देने का ऐलान किया।
बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर बड़ा कदम: योगेश वर्मा
दिल्ली नगर निगम शिक्षा समिति के अध्यक्ष एडवोकेट योगेश वर्मा ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि AIIMS और नगर निगम का संयुक्त प्रयास बच्चों के स्वस्थ भविष्य की दिशा में मजबूत कदम है। उन्होंने कहा कि यह केवल जांच कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को बेहतर स्वास्थ्य देने का मिशन है।
विशेषज्ञों ने बताया—समय पर जांच बेहद जरूरी
AIIMS के डॉ. प्रवीण वशिष्ठ के अनुसार देश में केवल लगभग 25% जरूरतमंद लोगों को ही चश्मा मिल पाता है। यदि बच्चों की आंखों की जांच स्कूल स्तर पर ही नियमित रूप से हो, तो गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है। AIIMS की टीम शिक्षकों द्वारा चिन्हित बच्चों की स्वयं जांच करेगी और जरूरत के अनुसार चश्मे व उपचार उपलब्ध कराएगी।