अंशुल त्यागी, गिग वर्कर्स के हक़ और सम्मान पर फिर उठी बहस
हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने देशभर में Blinkit डिलीवरी पार्टनर्स और गिग वर्कर्स की कार्य परिस्थितियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। वीडियो में Blinkit के एक डिलीवरी पार्टनर ने बताया कि उसने करीब 15 घंटे काम कर 28 डिलीवरी पूरी की, लेकिन इसके बदले उसे सिर्फ ₹763 की कमाई हुई। यह वीडियो सामने आने के बाद गिग इकॉनमी में काम करने वाले लाखों लोगों की मेहनत, वेतन और सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे।
सांसद राघव चड्ढा ने लिया संज्ञान
इस वायरल वीडियो पर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने तुरंत संज्ञान लिया। उल्लेखनीय है कि राघव चड्ढा पहले भी संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को मिलने वाले कम वेतन, अत्यधिक काम के घंटे और सामाजिक सुरक्षा के अभाव जैसे मुद्दों को मजबूती से उठा चुके हैं।
डिलीवरी पार्टनर की कहानी सामने आने के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से समर्थन जताते हुए कहा कि गिग वर्कर्स की समस्याओं पर तत्काल और ठोस सुधार की आवश्यकता है।
सांसद आवास पर लंच, खुलकर हुई बातचीत
संसद सत्र समाप्त होने के बाद सांसद राघव चड्ढा ने उस Blinkit डिलीवरी पार्टनर को अपने आवास पर लंच के लिए आमंत्रित किया। यह मुलाकात बेहद सहज और आत्मीय माहौल में हुई। बातचीत के दौरान डिलीवरी पार्टनर ने अपने अनुभव खुलकर साझा किए—
- लंबे और थकाऊ कार्य घंटे
- अनिश्चित और कम आय
- एल्गोरिदम आधारित टारगेट का दबाव
- किसी ठोस शिकायत निवारण व्यवस्था का अभाव
डिलीवरी पार्टनर ने जताया संतोष
अपनी बात सुने जाने पर डिलीवरी पार्टनर ने खुशी और संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि किसी जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह सीधे संवाद करना सम्मानजनक और भरोसा देने वाला अनुभव है। वहीं सांसद राघव चड्ढा ने आश्वासन दिया कि वे गिग वर्कर्स से जुड़े मुद्दों को नीतिगत स्तर पर मजबूती से उठाते रहेंगे।
Video – https://www.instagram.com/reel/DSptcGjE2M6/?igsh=MXRwaG9zaHVqMDVlZA==
“गिग इकॉनमी तभी टिकाऊ है जब वर्कर्स सुरक्षित हों” – राघव चड्ढा
राघव चड्ढा ने कहा कि भारत की गिग इकॉनमी तभी टिकाऊ और मजबूत बन सकती है, जब इसमें काम करने वाले लोगों की गरिमा, सुरक्षा और भलाई को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने दोहराया कि सरकार और प्लेटफॉर्म कंपनियों को मिलकर गिग वर्कर्स के लिए न्यूनतम आय, सामाजिक सुरक्षा और शिकायत निवारण तंत्र सुनिश्चित करना होगा।
अहम संदेश
यह मुलाकात एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि सार्थक नीतिगत बदलाव की शुरुआत ज़मीनी हकीकत को सुनने और समझने से होती है। गिग वर्कर्स की आवाज़ को नीति निर्माण तक पहुँचाना ही इस दिशा में पहला ठोस कदम है।