मूवी रिव्यू: पारो–पिनाकी की प्रेम कहानी

अंशुल त्यागी, सीवर की जहरीली गैस के साए में पनपती एक अधूरी लेकिन सच्ची मोहब्बत

रेटिंग: ⭐⭐⭐ (3/5)

आज के दौर में, जहां सिनेमा अक्सर बॉक्स ऑफिस और मुनाफे के गणित में उलझा नजर आता है, वहीं फिल्म ‘पारो–पिनाकी की प्रेम कहानी’ एक बिल्कुल अलग रास्ता चुनती है। यह फिल्म न तो ग्लैमर का दिखावा करती है और न ही कमाई के लालच में किसी फार्मूले का सहारा लेती है।

फिल्म देखने के बाद सबसे पहले जो बात दिल को छूती है, वह है इसकी लीड एक्ट्रेस और निर्माता इशिता सिंह की ईमानदार कोशिश। उन्होंने अपनी निजी पूंजी लगाकर एक ऐसे सामाजिक मुद्दे पर फिल्म बनाई है, जिसे हम अक्सर अखबारों के अंदरूनी पन्नों तक सीमित कर देते हैं—सीवर की सफाई के दौरान जहरीली गैस से होने वाली मजदूरों की मौत।


🧩 कहानी और विषय

हम में से ज्यादातर लोग ऐसी खबरें पढ़कर पन्ना पलट देते हैं। यही उदासीनता सरकार, सिस्टम और समाज में बैठे जिम्मेदार लोगों की भी रही है। लेकिन इस बार इस चुप्पी को तोड़ने की कोशिश की है राज्यसभा सांसद संजय सिंह की बेटी इशिता सिंह ने।

अपनी रिसर्च टीम के साथ उन्होंने इस गंभीर विषय को न सिर्फ समझा, बल्कि इसे एक बेहद सादगी भरी प्रेम कहानी के साथ परदे पर उतारा—एक ऐसी प्रेम कहानी, जो कभी अपने मुकम्मल अंजाम तक नहीं पहुंच पाती।


📖 स्टोरी प्लॉट

फिल्म की कहानी मुंबई की एक स्लम बस्ती से शुरू होती है। मरियम, जो सब्जी बेचने वाले अपने पिता के साथ गुजारा करती है, उसी मरियम को प्यार हो जाता है पास की कॉलोनी में रहने वाले पिनाकी से, जो पेशे से एक सीवर कर्मी है।

मरियम उर्फ पारो (इशिता सिंह) का प्यार इतना सच्चा है कि वह अपने हाथों से बना खाना लेकर रोज पिनाकी से मिलने जाती है। लेकिन समाज और हालात इस रिश्ते को कबूल नहीं करते। मरियम का पिता लालच में आकर उसे मानव तस्करी करने वाले गिरोह को बेच देता है।

इधर पारो अपने प्यार से बिछड़कर घुट-घुट कर जीने को मजबूर हो जाती है, और उधर पिनाकी उसे पाने की उम्मीद में सब कुछ भूलकर उसकी तलाश में निकल पड़ता है। क्या यह तलाश सफल होती है? क्या पारो को उसका सच्चा प्यार वापस मिलता है? इसका जवाब फिल्म देखने के बाद ही मिलता है।


🎭 अभिनय और निर्देशन

इशिता सिंह ने अपने किरदार को बिना मेकअप, बिना बनावट और पूरी सच्चाई के साथ निभाया है। उनका अभिनय कहीं भी बनावटी नहीं लगता। पिनाकी के किरदार में संजय बिश्नोई कुछ दृश्यों में कमजोर जरूर नजर आते हैं, लेकिन उनके अभिनय में भी ईमानदारी साफ दिखती है।

लेखक-निर्देशक रुद्र जादौन की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने बेहद सीमित बजट में पूरी फिल्म को आउटडोर लोकेशंस पर शूट किया और कहानी की आत्मा से कोई समझौता नहीं किया।


🎯 ओवरऑल रिव्यू

फिल्म एक भेंट में इशिता सिंह खुद कहती हैं कि यह कहानी सिर्फ एक लव स्टोरी नहीं, बल्कि समाज के उन तबकों की हकीकत दिखाने की कोशिश है, जिनकी चर्चा शायद ही कभी फिल्मों में होती है।

फिल्म में कुछ तकनीकी कमियां जरूर हैं, लेकिन जिस गंभीर मुद्दे को यह उठाती है, उसकी वजह से इन कमियों को नजरअंदाज किया जा सकता है। अगर आपको सच्ची घटनाओं और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी फिल्में पसंद हैं, तो ‘पारो–पिनाकी की प्रेम कहानी’ जरूर देखी जानी चाहिए।


🎬 फिल्म की जानकारी

कलाकार: इशिता सिंह, संजय बिश्नोई, हनुमान सोनी, धनंजय सरदेश पांडे
निर्माता: इशिता सिंह, उत्कर्ष सिंह, संजय बिश्नोई, प्रताप जादौन, समर सिंह
निर्देशक: रुद्र जादौन
संगीत: ब्रिटो
सेंसर सर्टिफिकेट: U
अवधि: 94 मिनट

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