मूवी रिव्यू: मर्दानी 3 – रानी के मजबूत कंधों पर टिकी एक सशक्त और जरूरी फिल्म

अंशुल त्यागी, रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐ (4/5)

बॉक्स ऑफिस और समीक्षकों—दोनों के स्तर पर सफलता हासिल कर चुकी मर्दानी फ्रेंचाइज़ी की तीसरी कड़ी मर्दानी 3 एक बार फिर यह साबित करती है कि कंटेंट अगर ईमानदार हो, तो विषय की गंभीरता कभी कमजोर नहीं पड़ती। पिछली दोनों फिल्मों की कामयाबी ने इस सीरीज और इसकी लीड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी को एक और सशक्त कहानी कहने का हौसला दिया है—और इस बार मुद्दा और भी ज्यादा ज्वलंत है।

आज के दौर में जब तीन से साढ़े तीन घंटे की लंबी फिल्में रिकॉर्ड बिजनेस कर रही हैं, वहीं करीब दो घंटे की मर्दानी 3 अपनी कसी हुई स्क्रिप्ट, तेज रफ्तार और गंभीर ट्रीटमेंट के चलते दर्शकों को शुरू से अंत तक बांधे रखती है। यह एक ऐसी फिल्म है जो मनोरंजन के साथ समाज को आईना दिखाने का साहस भी रखती है।


कहानी (स्टोरी प्लॉट)

फिल्म की कहानी एनआईए की सीनियर अधिकारी शिवानी शिवाजी रॉय (रानी मुखर्जी) के इर्द-गिर्द घूमती है। शिवानी को एक हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग केस सौंपा जाता है, जिसमें एक बड़े अधिकारी की बेटी और उसके घर में काम करने वाली नौकरानी की बेटी अचानक गायब हो जाती हैं।

जांच के दौरान यह केस और भयावह रूप ले लेता है, जब सामने आता है कि अलग-अलग इलाकों से 8 से 13 साल की 90 से ज्यादा बच्चियां लापता हो चुकी हैं। धीरे-धीरे शिवानी को एक संगठित मानव तस्करी गिरोह के सुराग मिलते हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, फिल्म ऐसे मोड़ पर पहुंचती है जिसकी कल्पना दर्शक भी नहीं करता।

इंटरवल के बाद फिल्म की रफ्तार इतनी तेज हो जाती है कि अगर आपकी नजर एक पल के लिए भी स्क्रीन से हटी, तो आप बहुत कुछ मिस कर सकते हैं।


अभिनय (Acting)

यह फिल्म पूरी तरह रानी मुखर्जी के कंधों पर टिकी है—और वह इसे बखूबी संभालती हैं। पिछली दोनों फिल्मों की तुलना में इस बार उनका किरदार ज्यादा गहराई और विस्तार लिए हुए है। रानी के फेस एक्सप्रेशंस, गुस्सा, संवेदनशीलता और एक पुलिस अधिकारी की अंदरूनी थकान—सब कुछ बेहद प्रभावशाली है। हर फ्रेम में उनका कंट्रोल और स्क्रीन प्रेजेंस शानदार है।

फिल्म की विलेन अम्मा के किरदार में मल्लिका प्रसाद चौंकाती हैं। उनकी मौजूदगी इतनी मजबूत है कि रानी और मल्लिका के आमने-सामने के दृश्य फिल्म को और धारदार बना देते हैं।

जानकी बोड़ीवाला शिवानी की टीम का अहम हिस्सा हैं और हर सीन में सहज व विश्वसनीय लगती हैं। बाकी सहायक कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय किया है।


निर्देशन और तकनीकी पक्ष

निर्देशक अभिराज मीनावाला की फिल्म पर मजबूत पकड़ साफ नजर आती है। उन्होंने कहानी को कहीं भटकने नहीं दिया और टोन को शुरुआत से ही गंभीर रखा—जो इस विषय के लिए जरूरी भी था। इंटरवल से पहले फिल्म थोड़ी धीमी जरूर लगती है, लेकिन क्लाइमेक्स न सिर्फ चौंकाता है बल्कि देर तक असर छोड़ता है।


ओवरऑल रिव्यू

मर्दानी 3 सिर्फ एक क्राइम थ्रिलर नहीं, बल्कि समाज के एक कड़वे सच से रूबरू कराती फिल्म है। यह बच्चियों की सुरक्षा, सिस्टम की जिम्मेदारी और पुलिस की एक साफ-सुथरी छवि को मजबूती से सामने रखती है—जो हिंदी सिनेमा में कम ही देखने को मिलती है।


क्यों देखें?

अगर आप

  • रानी मुखर्जी के फैन हैं
  • सच्चाई से टकराती, दमदार और महिला-केंद्रित फिल्में पसंद करते हैं
  • और कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा देखना चाहते हैं

तो ‘मर्दानी 3’ को बिल्कुल मिस न करें।


फिल्म की जानकारी

कलाकार: रानी मुखर्जी, जानकी बोड़ीवाला, मल्लिका प्रसाद
निर्माता: आदित्य चोपड़ा
निर्देशक: अभिराज मीनावाला
सेंसर सर्टिफिकेट: यू/ए
अवधि: 126 मिनट

By Quick News

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