अंशुल त्यागी, दिल्ली मेट्रोपोलिटन एजुकेशन (DME) के प्रबंधन विभाग द्वारा 8–9 अप्रैल 2026 को आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ने शिक्षा, उद्योग और नीति जगत के बीच एक सशक्त संवाद का मंच तैयार किया। “व्यवधान, लचीलापन और स्थिरता: कानून, व्यवसाय नीति, संचार और उद्यमिता के माध्यम से वैश्विक पारिस्थितिक तंत्र का भविष्य आकार देना” विषय पर आधारित यह सम्मेलन अपने उद्देश्य में पूरी तरह सफल रहा।
यह आयोजन केवल एक अकादमिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक ऐसा मंच बना जहाँ देश-विदेश के शिक्षाविद, उद्योग विशेषज्ञ, नीति निर्माता और छात्र एक साथ आए और वैश्विक चुनौतियों के समाधान पर गंभीर चर्चा की।
AI और अनुसंधान पर प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप
सम्मेलन से पहले 4 अप्रैल 2026 को ज़ाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज (इवनिंग), दिल्ली विश्वविद्यालय में “अनुसंधान में AI की भूमिका” विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई।
प्रो. हमेंद्र कुमार डांगी ने अपने सत्र में बताया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज शोध के हर चरण—डेटा विश्लेषण, साहित्य समीक्षा और अकादमिक लेखन—में क्रांति ला रहा है।
उन्होंने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि AI का उपयोग करते समय नैतिकता, मौलिकता और शोध की सत्यनिष्ठा बनाए रखना उतना ही जरूरी है। यह सत्र प्रतिभागियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रहा।
भव्य उद्घाटन: प्रेरक विचारों का संगम
8 अप्रैल को जामिया हमदर्द में आयोजित उद्घाटन सत्र में शिक्षा और नेतृत्व का शानदार संगम देखने को मिला।
मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) के. जी. सुरेश ने मीडिया, शासन और संस्थागत लचीलापन पर अपने विचार रखते हुए वर्तमान समय में प्रभावी संचार की भूमिका को रेखांकित किया।
इस अवसर पर डॉ. अनुराग बत्रा, प्रो. साकेत कुशवाहा, न्यायमूर्ति भंवर सिंह, प्रो. भरत सिंह और प्रो. (डॉ.) ऐशर आलम जैसे प्रतिष्ठित अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।
डिजिटल भविष्य पर कीनोट चर्चा
पहले दिन का मुख्य आकर्षण “डिजिटल भविष्य का निर्माण: मीडिया, बाजार और शासन” विषय पर आयोजित प्लेनरी कीनोट सत्र रहा।
इस सत्र में अरुण कर्णा, प्रो. सुरभि दहिया, प्रो. तरंजीत सभरवाल, प्रसून श्रीवास्तव और एडवोकेट ज्योति दत्त ने अपने विचार साझा किए।
उन्होंने बताया कि कैसे मीडिया, टेक्नोलॉजी और नीति मिलकर आने वाले समय का वैश्विक ढांचा तैयार कर रहे हैं।

140+ शोध पत्र और तकनीकी सत्र
सम्मेलन को देशभर से 140 से अधिक शोध-पत्र प्राप्त हुए, जो इस आयोजन की शैक्षणिक महत्ता को दर्शाते हैं।
तकनीकी सत्रों में शोधकर्ताओं ने अपने नवीन विचार प्रस्तुत किए और सार्थक चर्चाओं के माध्यम से ज्ञान का आदान-प्रदान किया।
समापन सत्र: सहयोग और नवाचार का संदेश
9 अप्रैल को DME में आयोजित समापन सत्र में शिक्षा, उद्योग और नीति के बीच सहयोग की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।
डॉ. कोमल विग के स्वागत भाषण के बाद, श्रीमती एम. लता गौतम, बिद्याधर मझी, चैताली शर्मा, प्रो. रेश्मा, प्रो. एफ. बी. खान और प्रो. भरत सिंह ने अपने विचार साझा किए।
सत्र का समापन बेस्ट पेपर अवॉर्ड, स्मृति चिह्न वितरण और प्रो. शालिनी गौतम के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
नेटवर्किंग और नई संभावनाएँ
नेटवर्किंग लंच के दौरान प्रतिभागियों को एक-दूसरे से जुड़ने और भविष्य के सहयोग के अवसर तलाशने का मौका मिला।
यह सम्मेलन न केवल ज्ञान साझा करने का माध्यम बना, बल्कि नए विचारों और साझेदारी की शुरुआत भी साबित हुआ।
निष्कर्ष
यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन इस बात का प्रमाण है कि जब शिक्षा, नीति और उद्योग एक साथ आते हैं, तो वे न केवल समस्याओं पर चर्चा करते हैं बल्कि उनके समाधान भी तैयार करते हैं।
DME का यह प्रयास वैश्विक स्तर पर सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक मजबूत कदम है।