अंशुल त्यागी, प्रेरणा शोध संस्थान न्यास के तत्वावधान में नोएडा के सेक्टर-62 स्थित राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान में आयोजित ‘प्रेरणा विमर्श–2025’ के अंतर्गत ‘नवोत्थान के नए क्षितिज’ विषय पर तीन दिवसीय वैचारिक कार्यक्रम के दूसरे दिन देश के प्रख्यात मीडियाकर्मियों, विचारकों, सांस्कृतिक चिंतकों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने समसामयिक विषयों पर गहन विमर्श किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पत्रिका ‘केशव संवाद’ के विशेषांक का विमोचन भी किया गया।
आर्थिक क्षेत्र में नवोत्थान पर गंभीर मंथन
रविवार को आयोजित प्रथम सत्र ‘धर्मस्य मूलं अर्थः’ (आर्थिक क्षेत्र में नवोत्थान) विषय पर वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने कहा कि आज भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपना स्वदेशी, सेल्फ-मॉडिफाइड डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करने की है। उन्होंने कहा कि एप्पल, अमेजन, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी विदेशी कंपनियां हर वर्ष भारत से अरबों रुपये बाहर ले जा रही हैं।


उन्होंने यह भी कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। रेलवे, हवाई सेवाएं, एक्सप्रेस-वे और अन्य बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विकास हुआ है। यूपीआई भुगतान प्रणाली आज दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल ट्रांजैक्शन व्यवस्था बन चुकी है और वर्ष 2014 के बाद आर्थिक वृद्धि दर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
इस सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य रूपेश कुमार ने कहा कि एक समय विश्व के कुल व्यापार का 25 प्रतिशत हिस्सा भारत से जुड़ा था। आज भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका युवा वर्ग है। देश में दो लाख से अधिक स्टार्टअप्स शुरू हो चुके हैं, जिनमें 48 प्रतिशत महिलाएं निदेशक और 18 प्रतिशत स्वामित्व में हैं। सरकार की नीतियों से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बुनियादी ढांचे के विकास से आर्थिक गति तेज हुई है और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ी है।
इस सत्र का संचालन ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हरीश बर्णवाल ने किया। उन्होंने कहा कि आज विचारों और नरेटिव की लड़ाई है और समय तेजी से बदल रहा है।


सामाजिक क्षेत्र में नवोत्थान: ‘हिन्दवः सोदरा सर्वे’
दूसरे सत्र में ‘सामाजिक क्षेत्र में नवोत्थान’ विषय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख राजकुमार मटाले ने कहा कि भारत का दर्शन विश्व कल्याण का संदेश देता है। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ भारत की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत में जाति व्यवस्था कर्म आधारित थी और ‘आर्य’ शब्द श्रेष्ठता का सूचक था, न कि किसी जाति का।
वी केयर फिल्म फेस्टिवल एंड ब्रदरहुड के निदेशक सतीश कपूर ने कहा कि भारतीय संस्कार समानता और सम्मान का संदेश देते हैं। वर्ष 2014 के बाद समाज की सोच में सकारात्मक परिवर्तन आया है। दिव्यांगजनों और पैरा ओलंपिक विजेताओं को समाज में समान सम्मान मिलने लगा है। सिनेमा और संवाद की संस्कृति में भी सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है।
इस सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार एवं टीवी एंकर रामवीर श्रेष्ठ ने किया।


सांस्कृतिक नवोत्थान: भारतीयता के मूल में आध्यात्म
तीसरे सत्र में ‘सांस्कृतिक क्षेत्र में नवोत्थान’ विषय पर अभिनेता एवं रंगकर्मी मनोज जोशी ने कहा कि भारतीयता के मूल में आध्यात्म है। उन्होंने कहा कि अनेक आक्रांताओं ने भारत की संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास किया, नालंदा जैसे विश्वविद्यालय जलाए गए, लेकिन श्रुति और स्मृति परंपरा के कारण ज्ञान सुरक्षित रहा।
मनोज जोशी ने कहा कि यदि रामायण जैसी ग्रंथ परंपरा न होती तो भारत में व्यापक धर्मांतरण हो चुका होता। श्रोताओं के आग्रह पर उन्होंने चाणक्य धारावाहिक के संवाद प्रस्तुत कर सभा को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस सत्र में संघ की अखिल भारतीय प्रचार टोली के सदस्य राजीव तुली और वरिष्ठ पत्रकार एवं इंडिया टीवी की एंकर मीनाक्षी जोशी ने भी विचार रखे।
कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने श्रोताओं के प्रश्नों के उत्तर दिए।
कार्यक्रम में संघ के उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के प्रचार प्रमुख कृपाशंकर, प्रेरणा शोध संस्थान न्यास की अध्यक्ष प्रीति दादू, प्रेरणा विमर्श–2025 के अध्यक्ष अनिल त्यागी, समन्वयक श्याम किशोर सहाय, सह संयोजक अखिलेश चौधरी, सचिव मोनिका चौहान, नोएडा विभाग के संघचालक सुशील कुमार, एनआईओएस के अध्यक्ष प्रो. अखिलेश मिश्रा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ऋतु दुबे तिवारी, डॉ. मनमोहन सिसोदिया एवं मोनिका चौहान ने संयुक्त रूप से किया।

