अंशुल त्यागी
‘ॐ गं गणपतये नमः’ ये मंत्र आपने कई बार, कई लोगों के मुंह से सुना होगा, ये भी सुना होगा कि मंदिर में भगवान गणेश जी (Ganesh) को सबसे पहले जल चढ़ाना उसके बाद शिवजी, पार्वती नंदी पर जल चढ़ाना, लेकिन गणेश जी को पहले क्यों पूजा जाता है उसके पीछे का सबसे बड़ा कारण उनकी बुद्धी था। वो कैसे था आपको बताते हैं।
क्या है कहानी/ मान्यता ?
मान्यता के अनुसार कहानी कुछ ऐसे है कि एक बार देवी देवताओं का शिव पार्वती के पास आगमन हुआ और इस दौरान इस बात पर विचार होने लगा कि आखिर तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं में से किसे धरती पर सबसे पहले पूजा जाए। विचार करते करते सभी देवी देवताओं ने अपनी अपनी राय देना प्रारंभ कर दिया तो कुछ ने अपने आप को सवोर्परी बताया तो कुछ ने अपने बच्चों को। कहानी या कथाओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि शिवजी ने उस दौरान एक प्रतियोगिता का आयोजन किया जिसमें कहा गया कि जो सबसे पहले ब्रह्मांड का चक्कर लगाकर वापस कैलाश पर लौटेगा उसे सबसे पहले पूजा जाएगा। सभी प्रतियोगियों के पास अपने-अपने वाहन थे जैसे कार्तिकेय के पास मयूर (मोर) और गणेश जी के पास मूषक (चूहा) ।
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सभी गिनती करके कैलाश से अपने – अपने वाहन पर निकल पड़े लेकिन गणेश जी चतुर थे और ये जानते थे कि चूहे पर बैठकर वो जीत नहीं सकेंगे इसलिए उन्होनें युक्ति (दिमाग) लगाई और अपने वाहन चूहे पर बैठकर शिव जी और पार्वती जी का चक्कर लगा लिया, कुछ समय के बाद सभी प्रतियोगी (देवी-देवता इत्यादि) कैलाश पर पहुंचे तो जाना कि गणेश जी को पहले ही विजेता घोषित किया जा चुका है, कारण पूछने पर भगवान शिव ने बताया कि ब्रह्मांड में सबसे ऊपर माता-पिता हैं और उनका चक्कर लगाना ब्रह्मांड का चक्कर लगाने जैसा है, इस कारण से गणेश जी (Ganesh) को विजयी घोषित किया गया। भगवान शिव की इस बात से सभी लोग सहमत दिखे और तभी से धरती पर भगवान गणपति को सबसे पहले पूजा जाता है।
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